HTML सीखें-3
April 1, 2008 by lovelykumari
html मे दो तरह के tags होते है एक जिन्हें बंद करने की जरूरत पडती है (जैसे<body></body ),और दुसरे जिन्हें बंद करने की जरूरत नही पडती (जैसे <hr><br>
. आज हम कुछ और टैग के बारे मे जानेंगे सबसे पहले पैराग्राफ टैग.अगर हम सोर्स कोड मे लाइन ब्रेक (Enter key) करेंगे तो इसका हमारे वेब पेज पर कोई प्रभाव नही पडेगा और पुरा पेज सिर्फ़ एक पैराग्राफ का ही होगा .इसे अलग अलग पैराग्राफ मे बाटने के लिए हम<p> टेग का इस्तेमाल करते हैं इसके लिए आपको सारे टेक्स्ट को <p></p> के अंदर डालना होगा.इसके अंदर हम कुछ attribute का इस्तेमाल करते है जैसे align जो text की alignment सेट करता है.इसके possible value होते हैं centre, left और right.उदाहरण देखिये
<html>
<head><title>first page</title></head>
<body>
<p align=”right”>right align.</p>
<p align=”left”>left align </p>
<p align=”center”>centre align</p>
</body>
</html>
इसमे कुछ और भी attribute होते हैं पर फिलहाल हम उन्हें छोड़ रहें हैं.और कुछ महत्वपूर्ण टैग हैं..
१.<br> टैग इसका इस्तेमाल पेज मे तब करते हैं जब वर्तमान लाइन को छोड़ कर उसके तुरंत बाद दूसरी नई लाइन सुरु करनी होती है (बिना पैराग्राफ बदले ).जहाँ लाइन बदलनी हो बस इसे लिख दीजिये इसे बंद करने की जरूरत नही होती</> से.
२.<hr> टैग इसका काम horizontal rule बनाना होता है इसमे आप align ,width और size यह तिन attribute दे सकते है.
३.और एक महत्वपूर्ण टैग है सेक्शन हेडिंग टैग.इसका सिंटेक्स होता है <hn></hn>,यहाँ न १ से लेकर ६ तक कोई भी संख्या रखी जा सकती है.इसका काम होता है.सेक्शन हेडिंग बनाना. उदाहरण देखें
<h1>heading 1</h1>
<h2>heading 2</h2>
आज के लिए इतना ही फ़िर मिलते है कुछ और टैग के साथ.


अति उत्तम! आपका थोड़ा-थोड़ा करके सीखाना बहुत कारगर है।
aap to chha gayi hain..
lage rahiye..
अच्छी लगी क्लास।
अरे ! आपके चिट्ठे मे आर्काइव दिख नही रहा ।
जानकारी के लिए धन्यवाद। आगे भी ऐसे ही जानकारी देते रहें।
बहुत बढ़िया जानकारी, मजा भी आ रहा है और समझ में भी
.. आर्काइव कॊ विजेट को वापस सैट करें गायब हो गई है।
आज भी मेरी उपस्थिति लगा लें । एक विनती है कि बीच में पढाना बन्द मत कर देना ।
mere takaniki chitthe par bhi padhaaren jo kuchh dino se band ho rakha tha..
aaj maine fir se ek nayaa post kiya hai.. aapse hi prerana mili hai..
http://pdtechtalk.blogspot.com/2008/04/blog-post.html
बहुत खूब. जो कह्ते है हिन्दी मे विग्य़ान नही पढा, पढाया जा सकता है, उन्हे जान लेना चाहिये कि भाषा और विषय का रिस्ता सिर्फ इतना ही है कि भाषा विषय को खोलने का काम करती है, खुद विषय नही होती. मुझे अपने ब्लाग पर चिट्थाजगत का एच टी एम एल लिन्क लगाने मे आपके पाथ से मद्द मिली. आभार.